उत्तराखंड के पर्वतीय एवं मैदानी क्षेत्रों में मानव और वन्यजीवों (जैसे गुलदार/लेपर्ड, बाघ, भालू और हाथी) के बीच बढ़ता संघर्ष एक गंभीर सामाजिक और पर्यावरणीय समस्या बन चुका है। ‘युवाउत्तराखंड’ का उद्देश्य ग्रामीणों, किसानों और वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा के लिए जागरूकता, आधुनिक तकनीकों और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से इस संघर्ष को नियंत्रित करना
वन क्षेत्रों में मानवीय दबाव बढ़ना
वन क्षेत्र और मानव बस्तियों के बीच संपर्क बढ़ने से संघर्ष की संभावना बढ़ती है।
वन सीमा के निकट बस्तियां एवं खेती
कई गांव और कृषि क्षेत्र वन्यजीवों के आवास के आसपास स्थित हैं।
प्राकृतिक जलस्रोतों में कमी
गर्मियों और सूखे के दौरान जल की उपलब्धता प्रभावित होने से वन्यजीव आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आ सकते हैं।
खुले में छोड़ा गया पशुधन/आवारा कुत्ते
ये कुछ क्षेत्रों में गुलदार जैसे वन्यजीवों के लिए आकर्षण का कारण बन सकते हैं।
फसल एवं खाद्य स्रोत
खेती, फलदार पेड़ तथा अन्य उपलब्ध खाद्य स्रोत वन्यजीवों को मानव गतिविधियों वाले क्षेत्रों के निकट ला सकते हैं।
जंगल की आग और आवास में परिवर्तन
आग, विकास कार्य तथा अन्य मानवीय गतिविधियां वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को प्रभावित कर सकती हैं।
✅ शांत रहें और सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
✅ बच्चों एवं बुजुर्गों को सुरक्षित स्थान पर ले जाएं।
✅ आसपास के लोगों को सावधानीपूर्वक सूचित करें।
✅ वन विभाग/प्रशासन को सूचना दें।
✅ घटना का स्थान और समय सही तरीके से बताएं।
वन्यजीव के पास न जाएं।
पत्थर या अन्य वस्तु फेंककर उसे न उकसाएं।
सेल्फी या वीडियो बनाने के लिए करीब न जाएं।
भीड़ इकट्ठी न करें।
बिना विशेषज्ञ सलाह के वन्यजीव को पकड़ने या भगाने का प्रयास न करें।
Youth Uttarakhand स्थानीय युवाओं और समुदायों को जोड़कर मानव–वन्यजीव संघर्ष के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सुरक्षित व्यवहार को प्रोत्साहित करने का प्रयास करेगा। हमारी पहल जन-जागरूकता
गांवों, स्कूलों और ग्राम सभाओं में जागरूकता अभियान।
युवा स्वयंसेवक नेटवर्क
स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण एवं जन-जागरूकता गतिविधियों से जोड़ना।
त्वरित सूचना तंत्र
वन्यजीव गतिविधियों की जानकारी संबंधित विभाग एवं प्रशासन तक पहुंचाने में सामुदायिक सहयोग।
सुरक्षा प्रशिक्षण
ग्रामीणों, युवाओं और विद्यार्थियों को सुरक्षित व्यवहार एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया की जानकारी।
घटनाओं का दस्तावेजीकरण
प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं और घटनाओं का तथ्यात्मक दस्तावेजीकरण।
प्रशासन से संवाद
स्थानीय समस्याओं को संबंधित विभागों एवं जनप्रतिनिधियों के समक्ष रखना।
वन्यजीव संरक्षण
वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास, जलस्रोतों और कॉरिडोर के संरक्षण में जनभागीदारी बढ़ाना।
पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने और ग्रामीण जीवन की सुरक्षा के लिए यूथउत्तराखंड द्वारा चलाए जा रहे सुरक्षा अभियान का मुख्य विवरण:
ग्रामीणों को आपातकालीन परिस्थितियों से बचाने के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन की गई किट प्रदान की जाती है:
रिफ्लेक्टिव जैकेट (Reflective Jacket): रात या धुंध के समय दूर से चमकती है, जिससे जंगली जानवरों के अचानक हमले का खतरा कम होता है।
उच्च क्षमता वाली टॉर्च (High-Beam Torch): अंधेरे पहाड़ी रास्तों पर दूर तक देखने और वन्यजीवों को दूर रखने में सहायक।
सायरन एवं सीटी (Siren & Whistle): आपातकाल में तेज आवाज करके जंगली जानवरों (गुलदार, भालू आदि) को भगाने और आसपास के लोगों को सतर्क करने के लिए।
आपदा नियंत्रण एवं आत्मरक्षा: ग्रामीणों और युवाओं को वन्यजीवों के सामने आने पर सुरक्षित बचाव के तरीके सिखाना।
झाड़ी कटाई एवं स्वच्छता: गाँव के रास्तों, पानी के स्रोतों और घरों के आसपास उगी घनी झाड़ियों की कटाई के लिए जन-अभियान चलाना, ताकि जानवर छिप न सकें।
आपातकालीन सूचना नेटवर्क: वन विभाग और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर गाँव स्तर पर ‘अर्ली वार्निंग सिस्टम’ तैयार करना।
“जागरूकता, आधुनिक तकनीक और सुरक्षा उपकरणों के सही उपयोग से मानव और वन्यजीव दोनों के जीवन की रक्षा करना तथा सुरक्षित पर्वतीय जीवन का निर्माण करना।”
अपने गांव या क्षेत्र में मानव–वन्यजीव संघर्ष की समस्या है?
हमें जानकारी साझा करें और अपने क्षेत्र की आवाज़ को आगे बढ़ाएं। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मानव–वन्यजीव संघर्ष से प्रभावित परिवारों और ग्रामीण समुदायों के साथ खड़े होने के लिए यूथउत्तराखंड एक सहयोगात्मक पहल चला रहा है।
आप भी इस अभियान से स्वयंसेवक बनकर या सहयोग देकर जुड़ सकते हैं।
सहयोग किट — मात्र ₹800
आपके सहयोग से एक सुरक्षा/सहायता किट तैयार कर ग्रामीण क्षेत्रों में अभियान से जुड़े लोगों तक पहुँचाई जा सकती है।
एक किट का सहयोग करें — ₹800
अपने ग्रामीण मित्रों और समुदाय के लोगों को भी इस पहल से जोड़ें। स्वयं जुड़ें और मानव–वन्यजीव संघर्ष के प्रति जागरूकता एवं सुरक्षित व्यवहार को बढ़ावा दें।
आपका छोटा सहयोग, किसी गाँव के लिए बड़ी मदद बन सकता है।