- समृद्ध
- सुरक्षित
- स्वावलंबी


युवाओं को स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार, कौशल विकास और डिजिटल साक्षरता से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ जल, जंगल और जमीन के संरक्षण हेतु सक्रिय रूप से कार्य करता है।

राज्य की समृद्ध देवभूमि संस्कृति, लोक कला, भाषा (कुमाऊंनी,गढ़वाली,जौनसारी) और हिमालयी पर्यावरण का भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षण करना।



हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए पारंपरिक जल स्रोतों के पुनरुद्धार और वनाग्नि रोकथाम अभियानों पर कार्य करता है। यह संस्था पिरुल के प्रसंस्करणऔर पौधरोपण के माध्यम से जल, जंगल और जमीन को सुरक्षित रखने के लिए युवाओं को एकजुट करती है।

स्थानीय कृषि उत्पादों लोकल उत्पाद और पहाड़ी हस्तशिल्प की डिजिटल ब्रांडिंग एवं मार्केटिंग के माध्यम से टिकाऊ आजीविका को बढ़ावा देता है। युवाओं को कौशल विकास, होमस्टे और कुटीर उद्योगों से जोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन रोकने और आत्मनिर्भरता पैदा करने के लिए कार्य करती है।
01स्थानीय संसाधनों, जैविक कृषि, बदरी गाय के उत्पादों और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देकर ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना।
02रिवर्स माइग्रेशन (पहाड़ वापसी) का अनूठा अभियान, जिसके तहत पर्वतीय गाँवों में होमस्टे, ईको-टूरिज्म और आजीविका के नए अवसर पैदा कर पलायन रोकना।
03: पर्वतीय क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए युवाओं को 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' (First Responders) के रूप में प्रशिक्षित करना और त्वरित राहत नेटवर्क तैयार करना।
04सीमावर्ती गाँवों में बुनियादी सुविधाओं, डिजिटल कनेक्टिविटी और होमस्टे को मजबूत कर सुरक्षा बलों का सहयोग करना और आबाद सीमाएं सुनिश्चित करना
05हिमालयी पर्यावरण, जल स्रोतों (नौले-धारे) और जैव विविधता के संरक्षण के लिए समर्पित प्रहरी। प्राकृतिक धरोहरों की सुरक्षा और पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने का संकल्प।
06सुरक्षित सफर, सुरक्षित उत्तराखंड" के तहत पर्वतीय मार्गों पर सुरक्षित ड्राइविंग, नियमों के पालन और दुर्घटनाओं को कम करने के लिए जन-जागरूकता फैलाना।
07ग्रामीणों को वन्यजीव सुरक्षा किट (रिफ्लेक्टिव जैकेट, सीटी, टॉर्च) प्रदान करना और प्रशिक्षण देकर मानव व वन्यजीव दोनों के जीवन की रक्षा करना।
08उत्तराखंड की पारम्परिक लोककला (ऐपण), लोकभाषा (गढ़वाली-कुमाऊंनी), व्यंजनों और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण एवं उन्हें स्वरोजगार से जोड़ना
09मुख्य उद्देश्य हर पहाड़ी और प्रवासी को अपनी माटी, संस्कृति और जड़ों से दोबारा जोड़ना है।
10पहाड़ी महिलाओं को स्वावलंबी बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) के गठन, प्रशिक्षण और विपणन पर विशेष ध्यान केंद्रित करता है।
11पहाड़ी क्षेत्र के बच्चों और युवाओं को आधुनिक तकनीक, डिजिटल साक्षरता, रोजगारपरक कौशल और अपनी समृद्ध सांस्कृतिक जड़ों से जोड़कर एक आत्मनिर्भर पीढ़ी का निर्माण करने के लिए प्रतिबद्ध है।
The Openfield Timeline

"यूथ उत्तराखंड" का मुख्य विजन उत्तराखंड के युवाओं की एक जीवंत, सशक्त और अपनी जड़ों से जुड़ी पीढ़ी तैयार करना है, जो न केवल आत्मनिर्भर और प्रगतिशील हो, बल्कि अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से भी गहराई से जुड़ी हो। ये युवा अपने गृह राज्य के सतत विकास में सक्रिय रूप से योगदान देंगे, जिससे उत्तराखंड भविष्य की पीढ़ियों के लिए समृद्धि और सांस्कृतिक संरक्षण का एक आदर्श मॉडल बन सके।
स्वरोजगार और उद्यमिता (Self-Employment & Entrepreneurship):स्थानीय उत्पाद एवं ब्रांडिंग: मंडुआ, झंगोरा, पहाड़ी दालें, मसाले और बदरी गाय के दूध उत्पादों की वैज्ञानिक पैकेजिंग और डिजिटल मार्केटिंग के माध्यम से युवाओं को एग्री-स्टार्टअप्स से जोड़ना। इको-टूरिज्म और होमस्टे: पारंपरिक शैली के पहाड़ी घरों को होमस्टे में बदलकर स्थानीय व्यंजनों, संस्कृति और साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देना। तकनीकी एवं डिजिटल समावेश (Digital Connectivity):पहाड़ी क्षेत्रों में इंटरनेट और ई-कॉमर्स सुविधाओं का विस्तार कर युवाओं को 'वर्क फ्रॉम माउंटेन', डिजिटल मार्केटिंग और ऑनलाइन व्यापार से जोड़ना। महिला सशक्तिकरण (Women-Led Enterprises):स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और ग्रामीण महिला उद्यमियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और हस्तशिल्प (जैसे ऐपण कला) के वैश्विक बाजार से जोड़ना।
पर्यावरण एवं जल स्रोतों का संरक्षण:पारंपरिक जल स्रोतों (नौले और धारे) का जीर्णोद्धार, वनों की आग (दावानल) पर नियंत्रण और पिरुल (Pine Needles) से बायो-ब्रिकेट्स बनाने जैसे पर्यावरण-अनुकूल उद्योगों को बढ़ावा देना।आपदा प्रबंधन एवं सुरक्षा नेटवर्क:स्थानीय युवाओं को SDRF/NDRF के सहयोग से 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' के रूप में प्रशिक्षित करना और आपदा चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करना। मानव-वन्यजीव संघर्ष नियंत्रण:वन्यजीव सुरक्षा किट (रिफ्लेक्टिव जैकेट, सायरन, सोलर फेंसिंग) और सामुदायिक जागरूकता अभियानों से ग्रामीणों की जीवन सुरक्षा सुनिश्चित करना। सीमांत क्षेत्रों का विकास ('वाइब्रेंट विलेज'):पिथौरागढ़, चमोली और उत्तरकाशी जैसे सीमांत जिलों में बुनियादी ढांचा, पर्यटन और आजीविका के साधन विकसित कर रिवर्स माइग्रेशन (गाँव वापसी) को संभव बनाना

भीमताल (मेहरा गाँव): उत्तराखंड की लोक संस्कृति को संजोने और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली विभूतियों को
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