उत्तराखंड के दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में जब स्थानीय संसाधनों, महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के हुनर और आधुनिक डिजिटल तकनीक का संगम होता है, तब जन्म लेता है—आजीविका एवं स्वावलंबन मॉडल (Livelihood & Store Initiative)।
यूथउत्तराखंड का यह प्रमुख उद्देश्य है कि पहाड़ के पारंपरिक उत्पादों (जैसे मंडुआ, झंगोरा, गहत, हर्बल चाय, ऐपण कला और हस्तशिल्प) को केवल स्थानीय मेलों तक सीमित न रखकर उन्हें देश के बड़े डिजिटल एवं भौतिक बाज़ारों से सीधे जोड़ा जाए।पहाड़ से पलायन का सबसे बड़ा कारण स्वरोजगार और उत्पादों के सही बाज़ार मूल्य का अभाव रहा है। गाँव की महिलाएँ और युवा बेहतरीन जैविक खाद्यान्न एवं हस्तशिल्प तैयार करते हैं, लेकिन मध्यस्थों के कारण उन्हें उचित दाम नहीं मिल पाता।
पहाड़ की समृद्धि का रास्ता यहाँ की माटी, संस्कृति और संसाधनों के संरक्षण से होकर ही गुज़रता है। ‘Livelihood & Store’ केवल एक व्यापारिक मॉडल नहीं है, बल्कि यह “स्वरोजगार से स्वावलंबन” और “एक कदम पहाड़ की ओर” संकल्प को ज़मीन पर उतारने का एक सशक्त अभियान है।






