महिला सशक्तिकरण और स्वयं सहायता समूहों (SHG) के सुदृढ़ीकरण में YouthUttarakhand की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और जमीनी स्तर पर प्रभावकारी रही है। संस्था का मुख्य ध्येय पर्वतीय क्षेत्रों की महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाना, उनके पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक बाज़ार से जोड़ना और नेतृत्व क्षमता का विकास करना है। ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों की महिलाओं को आत्मनिर्भर, जागरूक और सशक्त बनाने की दिशा में भी एक सक्रिय मंच के रूप में कार्य कर रहा है। महिलाओं की सहभागिता के बिना किसी भी समाज का समग्र विकास असंभव है,यूथउत्तराखंड’ द्वारा ‘Livelihood & Store’ की शुरुआत करना इस विजन को सीधे जमीन पर उतारने का सबसे प्रभावी तरीका है। जब महिलाओं के लिए एक समर्पित स्टोर और आजीविका मंच उपलब्ध होता है, तो इससे उत्पादों की बिक्री और ब्रांडिंग को एक स्थायी पहचान मिलती है।
डिजिटल और भौतिक स्टोर (Phygital Model): इसे केवल एक स्थानीय दुकान तक सीमित न रखकर, एक डिजिटल स्टोरफ्रंट / ऑनलाइन कैटलॉग के रूप में भी विकसित करना, ताकि दिल्ली-एनसीआर और देश के अन्य हिस्सों में बैठे लोग भी आसानी से ऑर्डर कर सकें।
प्रवासियों का बड़ा नेटवर्क इन स्टोर्स और डिजिटल कैटलॉग का नियमित ग्राहक बनता है, जिससे गाँव की स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाओं को साल भर एक निश्चित और स्थायी आय मिलती है।
प्रवासी समुदाय सोसायटियों, पर्वतीय मेलों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और फैमिली नेटवर्क के माध्यम से इन उत्पादों और स्टोर का प्रचार-प्रसार करते हैं।
आर्थिक मजबूती: जब शहरों में बैठा प्रवासी समुदाय अपने पहाड़ के बने उत्पादों को खरीदता है, तो उसका सीधा पैसा गाँवों में काम कर रही महिलाओं और किसानों के खातों में जाता है।
पलायन पर रोक: गाँवों में आजीविका के मजबूत साधन बनने से महिलाओं और उनके परिवारों को आर्थिक स्वावलंबन मिलता है, जो राज्य में पलायन रोकने और रिवर्स माइग्रेशन को बढ़ावा देने में बड़ी भूमिका निभाता है।
स्वास्थ्य एवं स्वच्छता (Menstrual & General Hygiene): मासिक धर्म स्वच्छता, पोषण और स्वास्थ्य जांच शिविरों का आयोजन करना।
कानूनी व सामाजिक अधिकारों की जानकारी: महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों, घरेलू हिंसा से सुरक्षा, और सरकारी कल्याणकारी योजनाके बारे में जागरूक करना।
सामुदायिक निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी: महिलाओं को स्थानीय पंचायतों, सामाजिक समितियों और सामुदायिक बैठकों में खुलकर अपनी बात रखने और नेतृत्व करने के लिए प्रोत्साहित करना।
सुरक्षित वातावरण का निर्माण: सार्वजनिक स्थलों और कार्यस्थलों पर महिलाओं के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और बाधा-मुक्त वातावरण तैयार करना।
बालिका शिक्षा पर ज़ोर: ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों की निरंतर पढ़ाई और उच्च शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए जागरूकता अभियान चलाना व छात्रवृत्ति/संसाधन उपलब्ध कराना।